ख़ुद को "फेमिनिस्ट" कहने में मुझे हमेशा से गर्व रहा है यह अलग बात है कि बहुत से लोग जब इस शब्द का प्रयोग करते हैं तो लगता है जैसे वह उन औरतों (कुछ पुरूष भी ) की बात कर रहें जो उन के अनुसार सामाजिक कायदे कानून से बगावत करने पर आमदा हैं और इसलिए समाज में उन्हें आदर कि अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए । "फेमिनिस्ट" होना जैसे जाति बाहर होने जैसा है ,समाज के एक वर्ग के लिए इसका प्रयोग गाली के समान है ..याद है की कॉलेज के दिनों में कुछ सहेलियों की माँ कहा करती थीं कि इस की बातें मत सुना करो ,यह दिमाग ख़राब कर देगी । कॉलेज में एक बार एक प्रोफ़ेसर ने कहा था की यदि मैं शादी का एक साल पूरा कर लूँ तो उन्हें चिट्ठी लिख कर जरुर बताऊँ और शाद्दी के बाद भी पति के ऐसे कुछ मित्र हैं जो अपनी पत्नियों को मुझ से ज्यादा वार्तालाप न करने कि सलाह देते हैं ।
तो आख़िर क्या है "फेमिनिस्ट" होना ? ज्यादातर लोग इसे "पुरूष विरोधी" होना परिभाषित करते हैं और मेरा यह लेख उन्ही लोगों के लिए है । नारीवाद या फेमिनिस्म का मतलब पुरूष विरोधी होना नही अपितु महिलाओं एवं पुरुषों के समान अधिकारों कि लडाई है ..लडाई इसलिए क्योंकि अनेक युगों से यह अधिकार महिलाओं को मांगने भर से नहीं मिले हैं । इतिहास गवाह है कि फ्रांस जैसे देश जिन्होंने विश्व को मौलिक अधिकार, प्रजातंत्र,राष्ट्र, स्वंत्रता जैसे कांसेप्ट्स से अवगत कराया ,क्रांति को एक नया रूप दिया वहां भी महिलाओं को मत डालने का मौलिक अधिकार मिलने मैं अनेको अनेक वर्ष लग गए। आज विश्व आधुनिकता , प्रगति के एक नए शिखर पर खड़ा है पर महिलाएं कभी घर में,कभी कॉलेज स्कूलों में,कभी दफ्तर में तो कभी बस कि कतार में अपने वजूद और उसके लिए सम्मान कि लडाई हर पल लड़ रही हैं ।
फेमिनिस्ट होना पुरुषों के लिए नकारात्मक नहीं है अलबत्ता कुछ पुरूष हैं जो बहुत गर्व से ख़ुद को फेमिनिस्ट कहते हैं । सीधे सादे शब्दों मैं इसका मतलब हैं औरतें उन किसी भी शर्तों पर जीवन जीने के लिए बाध्य नहीं हैं जो एक पुरूष पर लागु नहीं होती और हर वह अधिकार जो पुरुषों के लिए समाज ने तय किया है उसमे औरतों कि भी पुरुषों के समान भागीदारी है । विवाह करने का मतलब यह नहीं कि हमें उस उपनाम का त्याग करना हो जिस से हम २३-२४ साल तक जाने गए हैं , ज्यादा रोष तो मुझे तब होता जब कुछ परिवार अपनी पुत्रवधू का नाम तक बदल देते हैं ..ऐसे नियम पुरुषों के लिए तो नहीं हैं ! विवाह का अर्थ तो नहीं कि जिन माता पिता ने हमें जन्म दिया उन्ही से मिलने के लिए हम ससुराल के हर सदस्य के सामने अर्जी दें और उसके स्वीकार होने कि प्रतीक्षा करें ...क्यूँ बेटों के माता पिता दहेज़ जुटाने कि चिंता मैं रात रात भर नहीं जागते ? क्यों एक पुरूष कभी भी अपने करियर से समझौता करने के लिए बाध्य नहीं किया जाता? क्यों एक साधारण सा दिखने वाला पुरूष अपने लिए जीवन साथी के रूप में विश्वसुन्दरी की कामना रखता और क्यों शादी की लिए होने वाले "परेड" में लड़की का नाखून तक जांचा जाता है ?
फेमिनिस्ट होने का अर्थ है की यदि एक पुरूष को अपनी महिला मित्रों से बात करने की स्वतंत्रता है तो एक महिला के लिए पुरुषों से मेल जोल रखना चरित्र का सवाल नहीं बन जाना चाहिए। जब बी.एड कर रही थी तो एक बार कक्षा में पुरूष सहपाठियों द्वारा एक ऐसी लड़की के बारे में विरोध किया गया जो धुम्रपान करती थी ,तर्क था की लड़कियों को यह सब शोभा नहीं देता ..में इस से दोराय नहीं रखती की सिगरेट पीना सेहत के लिए हानिकारक है पर वहां मुद्दा सेहत का था ही नहीं ,मुद्दा था एक औरत को क्या शोभा देता है क्या नहीं ? मेरे व्ही पुरूष सहपाठी लडकियां बैठे रहने पर भी बिना अनुमति लिए सिगरेट के धुएं के झल्ले उडाया करते थे पर लड़कियों को क्या शोभा देता है क्या नहीं पर राय काफ़ी मजबूत थी । कौन तय करेगा की हमारे लिए क्या शोभनीय है क्या नहीं ?धुम्रपान करना हानिकारक है पर यदि इस चेतावनी को अनदेखा करअपनी मनचाही करने का जितना अधिकार एक पुरूष को है उतना ही एक महिला को भी है तो फिर छवि में भेद भाव क्यों?
फेमिनिस्ट होना इच्छा है रात को २ बजे सड़क पर बेकौफ चलने के ? यह इच्छा है मनमुताबिक कपड़े पहनाने की न की यह आरोप सुनाने की कि बलात्कार और छेड़खानी वास्ताव में लडकियां ख़ुद ही आमंत्रित करती हैं ,फेमिनिस्म का मतलब हैं कन्या भ्रूण हत्या के ख़िलाफ़ मोर्चा उठाना और हर लड़की को सिक्षा दिलाना ...नारीवाद प्रतिक है भाषा,कार्य,अधिकार हर रूप में पुरुषों के बराबरी कि जगह पाने कि ..नारीवाद का मतलब है दफ्तर में हमारे कार्य के लिए इज्ज़त से देखे जन बनिस्बत इस बात के कि हम क्या पहन कर आयें हैं या किसके साथ आयें हैं ...
एक बार सड़क पर किसी से गाड़ी को ले कर बहस हो गई जब मैंने कुछ बोलने का प्रयास किया तो महाशय ने कहा में औरतों से बात नहीं करता ..मुझ से रुका न गया और मैंने कहा कि आप एक औरत से शादी कर सकते हैं ,उसके साथ सो कर बच्चे पैदा कर सकते हैं और यहाँ भी आपका काम सोने तक में ही सिमित होता है..उसकी बाद सब जिमेदारी औरत कि होती है ,औरत आपके लिए खाना बना सकती है और रात ३ बजे तक आपका इंतज़ार कर सकती है , औरत आपके लिए वो हर काम करती है जो आपको ख़ुद करना चाहिए पर फिर भी औरत से बात करना आप कि शान के ख़िलाफ़ है ..फेमिनिस्ट होने का मतलब इन सब बातों पर पूर्ण विराम लगाना है ।
बहुत बार हम सबने कुछ बातें सुनी है जैसे कि "लड़कियों कि तरह मत रो", "मर्द बन के दिखा",क्या औरतों कि तरह बातें बना रहा है" और ऐसा बहुत कुछ ..फेमिनिस्म का मतलब है न केवल भाषा में बल्कि आम जीवन में भी इन धारणाओं को तोड़ना है ..कुछ कहावतें और भी है जैसे जोरू का गुलाम इत्यादि ..देखने कि बात यह है कि समाज और उसकी भाषा कैसे दोनों ही महिलाओं के साथ भेद भाव करते हैं। किसी भी कक्षा कि किताब उठा कर देखें आप पाएंगे कि स्त्रीलिंग नाम एवं सर्वनाम अध्यापिका,सेक्रेटरी, घर के काम इत्यादि से जोड़ कर प्रयोग किए जाते हैं वहीं पुलिस अफसर ,सेना, राजनेता, इत्यादि कार्यों के साथ पुल्लिंग नाम एवं सर्वनाम प्रयुक्त होते हैं। क्या कभी किसी ने "बिन्ब्याहा पिता" या "सिंगल फादर" या "कामकाजी पिता " जैसा कुछ सुना हैं वहीं क्यों बिनब्याही माँ ,वर्किंग मदर आदि सुनते हुए हें अटपटा नहीं लगता ..अटपटा नहीं लगता क्योंकि आदत हो गई हैं...
आदत हो गई हैं महिलाओं के लिए ऐसे बर्ताव की भाषा की ,धारणाओं की ..फेमिनिस्म इन्ही आदतों को तोड़ने का प्रयास हैं ...यह प्रयास हैं अपनी पहचान और आत्मा सम्मान को पुनः परिभाषित करने के ,यह प्रयास हैं उन सभी बन्धनों को तोड़ने का जिन्होंने आज तक महिलाओं को उनकी इच्छा और सम्मान के विरूद्व जकड के रखा हैं ..फेमिनिस्म पुरुश्विरोधी नहीं हैं बल्कि एक प्रयास हैं ख़ुद को पहचानने का और उस पहचान को स्वीकृति दिलाने के ..फेमिनिस्म हैं औरत होने में गर्व महसूस करना ..नाकि यह गुनगुनाना की अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो